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परंपरागत संचार क्या है? (traditional communication in hindi) परंपरागत माध्यम और लोकमाध्यम से परिचय।

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  परंपरागत संचार (traditional communication) परंपरागत संचार का तात्पर्य ऐसे संचार से है जो, वर्तमान जनसंचार माध्यमों की अपेक्षा परंपरागत माध्यमों से किया जाता हो। परंपरागत संचार सदियों से ज्ञान, लोक न्याय और संवाद के मंच के तौर पर प्रयोग होता आया है। सभी समाज परंपराओं में रचे बसे अनेक ऐसे माध्यमों के जरिये संचार करते हैं जिनमें निहायत देसज और ग्रामीण प्रतीकों-संकेतों को उपयोग में लाया जाता है। परंपरागत संचार का, जनसंचार माध्यमों से उलट जनता से निजी नाता होता है। परंपरागत या लोक माध्यम आम लोगों के दिलो और दिमाग से जुड़े होते हैं, इसलिए उनका असर भी व्यक्तिगत और गहरा होता है। इसके अलावा उनका कथ्य, शैली स्थानीय बोली भी संचार को ज्यादा सहज बनाती है। वहीं, देशव्यापी दृष्टि से देखें तो परंपरागत संचार और लोक कला समग्र रूप से अकेला जनसंचार माध्यम है, जिनकी जड़ें इस देश की बहुसंख्यक आबादी की परंपरा और अनुभवों से जुड़ी है। उदाहरण के रूप में सभी प्रकार की लोक कथा, लोक नृत्य, लोक गीत, लोक नाटय विधाएं, तमाशा, पावदा अथवा पालवा, कीर्तन, यक्षगान, दशावतार, नौटंकी, रामलीला और रासलीला, जात्रा, ...

संचार (Communication) क्या है?, संचार के प्रकार, संचार प्रक्रिया

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संचार हमारा मौजूदा समय सूचना युग, संचार युग और अब साइबर या नेटवर्क युग के नाम से पुकारा जाता है। अपने मूल उद्देश्य से संचार शब्द ने खासा लंबा सफर तय कर लिया है। संचार शब्द अंग्रेजी के कम्युनिकेशन शब्द का समानार्थी है, इसका पहले पहल यातायात के साधन के रूप में प्रयोग किया गया बाद में अब यह प्रसारण से जुड़ गया। मूलतः कम्युनिकेशन शब्द लैटिन भाषा की संज्ञा कम्युनिस और क्रिया कम्युनिकेयर से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'टू मेक कॉमन' या 'साझा करना'।  जब दो या दो से अधिक व्यक्ति कोई जानकारी साझा करने के लिए, मिलने-जुलने के लिए, खाने के बारे में बात करने के लिए, मेले में या दुख के क्षण में आदि के लिए एक दूसरे से संपर्क करते हैं, तो उसे संचार कहते हैं।  वास्तव में, संचार एक घटना नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक साझेदारी है। यहां तक कि अपने आप से बात करना, दैवीय शक्तियों या उनके विभिन्न रूप से बात करना, आत्माओं की दुनिया या अपने पूर्वजों से विचारों अथवा भावनाओं को साझा करना भी संचार की परिधि में आ जाता है। संचार के प्रकार (Types of communication) संचार को कई प्रकार से वर्गीकृत किया ...

प्रतिरूप का मूल्यांकन बताइए? Evaluation of model in hindi

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  प्रतिरूप का मूल्यांकन (Evaluation of model)          प्रतिरूप का मूल्यांकन संचार प्रतिरूपप के कार्यों के आधार पर न्यादर्श के मूल्यांकन किए जा सकते हैं। जैसे- प्रतिरूप में कितनी समानता है? इसमें कितने तत्वों को कितने प्रभावी ढंग से शामिल किया जा सकता है? प्रतिरूप में स्वतः शोध प्रणाली का गुण किस हद तक मौजूद है?‌ यह नए तथ्यों एवं प्रणालियों की खोज तथा उनके आपसी संबंधों की खोज में कितना उपयोगी है? प्रतिरूप से निकलने वाले पूर्वानुमान किस हद तक महत्वपूर्ण हैं? प्रतिरूप से की जाने वाली माप किस हद तक शुद्ध है? ड्यूस्क ने प्रतिरूप के इन मूल्यांकन के अतिरिक्त भी निम्नलिखित सिद्धांतों को और सम्मिलित किया है। प्रतिरूप कितना मौलिक है? या यह कैसे न्यादर्श होने योग्य है? प्रतिरूप की सरलता क्या है? यह कितना कम खर्चीला है? प्रतिरूप कितना वास्तविक है? क्या इसमें भौतिक वास्तविकता के प्रतिनिधित्व पर विश्वास किया जा सकता है। उक्त मानदंडों का मूलाधार सिद्धांत निर्माण में उनका योगदान है। किंतु, अतिरिक्त निम्नलिखित विशेषताओं के आधार पर भी सृजनात्मक प्रतिरूपों का मूल्यांकन कि...